Newspost, Editor’s Desk. @rohitgupta
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (CTUs) और इंडिपेंडेंट सेक्टोरल फेडरशनों और एसोसिएशनों के जॉइंट प्लेटफॉर्म द्वारा 12 फरवरी 2026 की देशव्यापी हड़ताल के आम असर से संबंधित मीडिया को जारी बयान में कहा गया है कि आम हड़ताल को लेकर मज़दूरों, किसानों और दूसरे तबकों की देश भर में बड़े पैमाने पर की गई लामबंदी बहुत सफल रही। इस हड़ताल में 30 करोड़ से ज़्यादा मज़दूर, किसान और दूसरे तबके से लोग शामिल हुए। कहीं कहीं बीएमएस के लोग भी केंद्र सरकार की जन विरोधी, देश विरोधी नीतियों के विरोध में खड़े हुए।
हड़ताल का एजेंडा :
- • चार लेबर कोड और उसके नियमों को रद्द किया जाए।
- • ड्राफ्ट सीड बिल और इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल वापस लिया जाए
- • “सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ़ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) एक्ट” वापस लिया जाए
- • MGNREGA को फिर से शुरू करने और विकसित भारत – रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट, VBG RAM G 2025 को खत्म करें।
- • इंश्योरेंस कंपनियों में 100% FDI का फैसला वापस लें।
- • विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, 2025 वापस लें।
- • सरकारी, पब्लिक सेक्टर की खाली पोस्ट भरें; आंगनवाड़ी, ASHA, MDM वर्कर्स को रेगुलर करके सरकारी कर्मचारी बनाएं, NHM के डॉक्टरों और नर्सों को परमानेंट करें।
- • USA-इंडिया ट्रेड डील को स्वीकार नहीं किया जाए, जो भारतीय किसानों, छोटे बिज़नेस और ट्रेड के हितों को बेचती है।
- • पब्लिक सेक्टर की कंपनियों और पब्लिक सर्विसेज़ के निजीकरण को बंद करें।
पिछली हड़तालों का टूटा रिकॉर्ड
जारी बयान के अनुसार, 12 फरवरी को देश भर में आम हड़ताल को लेकर पिछली हड़तालों से ज्यादा सभी सेक्टर्स, संगठित/असंगठित, सरकारी, पब्लिक सेक्टर, इंडस्ट्रियल एरिया, ग्रामीण और शहरी भारत में बड़े पैमाने पर लामबंदी की गई। जॉइंट प्लेटफॉर्म ने, संयुक्त किसान मोर्चा के घटकों और खेती-बाड़ी के मज़दूर यूनियनों के जॉइंट फ्रंट के साथ मिलकर देश के 600 से ज़्यादा ज़िलों में हड़ताल और बड़े पैमाने पर लामबंदी करने में कामयाबी हासिल की। बताया गया कि कई जगहों पर स्टूडेंट्स और नौजवानों को 'शिक्षा बचाओ', 'रोज़गार की गारंटी दो', 'खाली पोस्ट भरो' जैसे नारे लगाते हुए देखा गया।
रास्ता रोको और रेल रोको में सबसे आगे ICDS, ASHA, मिड-डे मील, बीड़ी सेक्टर की औरतें, घरेलू कामगारों के साथ-साथ कंस्ट्रक्शन, हॉकर और वेंडर, लोडर/अनलोडर, सेल्फ-एम्प्लॉयड घर से काम करने वाले पीस रेटेड मज़दूर, मछली मज़दूर जैसे दूसरे असंगठित सेक्टर के मज़दूर शामिल थे। कई राज्यों में कई जगहों पर ई-रिक्शा चलाने वालों, ऑटो और टैक्सी यूनियनों ने हिस्सा लिया। कई ग्रामीण इलाकों में किसान और खेती-बाड़ी के मज़दूर बड़ी संख्या में जमा हुए।
माइनिंग/मैन्युफैक्चरिंग/सर्विस सेक्टर पर पड़ा असर
दावा किया गया है कि माइनिंग/मैन्युफैक्चरिंग/सर्विस सेक्टर में फॉर्मल और इनफॉर्मल लेबर के बीच हड़ताल और लामबंदी का बहुत बड़ा असर देखा गया। कोयला, एनएमडीसी लिमिटेड, अन्य गैर-कोयला खनिज जैसे लौह अयस्क, तांबा, बॉक्साइट, एल्युमीनियम, सोने की खदानें इत्यादि, इस्पात, बैंक, एलआईसी, जीआईसी, पेट्रोलियम, बिजली, डाक, ग्रामीण डाक सेवक, दूरसंचार, परमाणु ऊर्जा, सीमेंट, बंदरगाह और गोदी चाय बागान, जूट मिलों, सार्वजनिक परिवहन, निजी क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के परिवहन, विभिन्न क्षेत्रों/राज्यों में राज्य सरकार के कर्मचारी और डाक, आयकर, लेखा परीक्षा और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में केंद्र सरकार के कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों सहित देश के अधिकांश औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक/कर्मचारी बड़े पैमाने पर हड़ताल में शामिल हुए और जुलूस निकाला। रक्षा क्षेत्र के कर्मचारियों ने हड़ताल के समर्थन में एक घंटे काम बंद रखकर विरोध प्रदर्शन किया।
कुछ राज्यों में रहा व्यापक बंद !
देश के अनेक राज्यों जैसे पुडुचेरी, असम, ओडिशा, झारखंड, तमिलनाडु, पंजाब, केरल, पश्चिम बंगाल, गोवा इत्यादि में बंद जैसे हालात रहे। राजस्थान, हरियाणा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा इत्यादि के अनेक क्षेत्रों में भी कई इलाको से बंद की खबरें मिलीं। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली और गुजरात में औद्योगिक और क्षेत्रीय हड़ताल हुई। बताया गया कि सरकार द्वारा विभिन्न तरीकों से लोकतांत्रिक आंदोलनों को पंगु बनाने के प्रयासों से मजदूर वर्ग और कृषक समुदाय में और अधिक गुस्सा है। शिक्षा और हेल्थ का व्यावसायीकरण लोगों के लिए एक बड़ा झटका है। शिक्षा, हेल्थ और सोशल वेलफेयर के लिए बजट में सिर्फ 6% का आवंटन है, जबकि डिफेंस और ट्रांसपोर्ट को 22% मिलता है। यह सब जानते हैं कि सरकार अपने चुने हुए कॉर्पोरेट दोस्तों के फायदे के लिए डिफेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर का बड़े पैमाने पर प्राइवेटाइजेशन कर रही है। हालिया US Trade डील जिसमें भारतीय सामानों पर 18 परसेंट टैरिफ लगाया गया है, जबकि भारत में अमेरिकी सामानों के इंपोर्ट पर ज़ीरो टैरिफ लगाया गया है, यह हमारे किसानों, पशुपालन सेक्टर और MSMEs के लिए एक और झटका है।
जंतर-मंतर पर की गई सभा –
जानकारी दी गई कि दिल्ली में, ट्रेड यूनियनों ने हड़ताल के तहत सभी इंडस्ट्रियल एरिया में जुलूस निकाले; जंतर-मंतर पर हुई एक बड़ी मीटिंग को भी सेंट्रल ट्रेड यूनियन के नेताओं ने संबोधित किया और उन्हें देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में ग्रामीण और शहरी इलाकों में चल रही कार्रवाइयों के बारे में बताया। मीटिंग को संबोधित करने वालों में अशोक सिंह-INTUC, अमरजीत कौर-AITUC, हरभजन सिंह सिंधु-HMS, सुदीप दत्ता-CITU, आरके शर्मा-AIUTUC, जी देवराजन-TUCC, लताबेन-SEWA, राजीव डिमरी-AICCTU, शत्रुजीत सिंह-UTUC. इसके अतिरिक्त संतोष कुमार-MEC तथा किसान नेताओं ने भी संबोधित किया।
देशव्यापी हड़ताल : संयुक्त मोर्चा व प्रबंधन के आंकड़े उलट, हड़ताल का रहा मिला-जुला असर
केंद्रीय श्रम संगठनों के आह्वान पर की गई एक दिवसीय देशव्यापी हड़ताल में कोल इंडिया में मिला जुला असर देखने को मिला है। इस हड़ताल को लेकर संयुक्त मोर्चा एवं एनसीएल प्रबंधन के आंकड़े बिल्कुल उलट हैं। बता दें कि सीआईएल में मान्यता प्राप्त 5 में से भारतीय मजदूर संघ को छोड़कर अन्य 4 श्रम संगठन एटक, इंटक, सीटू व एचएमएस इस हड़ताल में शामिल रहे।

NCL सिंगरौली में दिखा असर -
संयुक्त मोर्चा के मीडिया प्रवक्ता के पी शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि एनसीएल सिंगरौली में यह हड़ताल पूर्ण रूप से सफल रहा। एनसीएल के सभी परियोजनाओं में प्रथम पाली में उत्पादन एवं डिस्पेंच पूरी तरह बंद रहा। दूसरी पाली में भी हड़ताल का अच्छा खासा असर रहा। हड़ताल के दौरान लगभग 70 प्रतिशत से भी अधिक कर्मचारी अपने कार्य से विरत रहे। मुख्यालय परिसर भी कर्मचारियों से खाली रहा। अस्पताल व अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को हड़ताल से छूट दी गई थी। जबकि प्रबंधन सूत्रों का कहना है कि उत्पादन व डिस्पैच पर अधिकतम 25-30 प्रतिशत ही प्रभाव रहा, अलबत्ता अनुपस्थिति लगभग 50 प्रतिशत बताई गई है।
हड़ताली संगठनों का मानना है कि कोल इंडिया में हड़ताल पूर्णतः सफल रहा। कोल इंडिया प्रबंधन फर्जी आंकड़े देकर हड़ताल को विफल बताने का प्रयास कर रही है। हड़ताल के दौरान किसी तरह की अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। हड़ताल शांति पूर्ण रही। संयुक्त मोर्चा द्वारा हड़ताल के असर से जुड़ी जानकारी के अनुसार साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की 16 में से 4 बड़ी परियोजनाओं में शत् प्रतिशत और कंपनी स्तर पर हड़ताल का कुल 87% विपरीत प्रभाव पड़ा।
Impact of Strike in SECL (COAL) CG & MP
कोल इंडिया की बड़ी कंपनी एसईसीएल से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार – 👇🏻
- 1. हसदेव एरिया – 95%
- 2. जोहिला एरिया – 100%
- 3. सोहागपुर एरिया – 80%
- 4. जमुना कोतमा एरिया – 95%
- 5. कोरबा एरिया – 100%
- 6. रायगढ़ एरिया – 80%
- 7. कुसमुंडा एरिया – 76%
- 8. गेवरा एरिया – 90%
- 9. दीपका एरिया – 63%
- 10. भटगांव एरिया – 95%
- 11. बैकुंठपुर एरिया – 100%
- 12. चिरिमिरी एरिया – 100%
- 13. बिश्रामपुर एरिया – 81%
- 14. SECL H.Q. – 22%
- 15. CWS गेवरा – 26%
- 16. CWS कोरबा – 60%
- SECL टोटल – 87%
इनका कहना है -
साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड में संयुक्त मंच के मीडिया प्रवक्ता वी एम मनोहर ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि 4000 से ज़्यादा कॉन्ट्रैक्ट/आउट सोर्स/MDO वर्कर्स ने भी हड़ताल में बराबर हिस्सा लिया जिससे रेल/रोड डिस्पैच और कोल ट्रांसपोर्ट पूरी तरह रुक गया।
उन्होंने बताया कि लगभग सभी माइंस और 120 से ज़्यादा माइंस से जुड़ी जगहों पर मीटिंग, नारे, शोर शराबा, मोटर साइकिल रैली, मशाल रैली, माइक अनाउंसमेंट हुए। सोहागपुर, बैकुंठपुर, दीपका के पास तीन कन्वेंशन में लगभग 897 लोगों ने हिस्सा लिया। बताया गया कि पहली बार महिला वर्कर्स ने भी कई यूनिट्स/एरिया में पिकेटिंग में हिस्सा लिया।
हैरानी की बात -
यहां से हैरान करने वाली बात यह भी बताई गई कि बड़ी संख्या में BMS सदस्यों ने भी सरकार के चार खतरनाक लेबर कोड हटाने तथा हड़ताल में हिस्सा लिया। जबकि आधिकारिक रूप में BMS ने स्वयं को इस हड़ताल से अलग रखा हुआ था।
प्रवक्ता ने बताया कि SECL में 1 से 12 फरवरी 2026 तक 30000 लोग इस हड़ताल को सफल बनाने के लिए इकट्ठा हुए। उन्होंने इसे ऐतिहासिक हड़ताल बताया है।
