Newspost, Spiritual Desk, Swami Dayanand Sharma.
या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।
भुक्तिमुक्तिकारिणी भक्तकष्टनिवारिणी।
भव सागर तारिणी सिद्धिदात्री नमोअस्तुते॥
ज्योतिषियों की मानें तो 11 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 06 मिनट तक अष्टमी है। इसके बाद नवमी है। साधक दोपहर 12 बजे तक मां महागौरी की पूजा कर सकते हैं। इसके बाद नवमी (Shardiya Navratri 2024) तिथि में सिद्धि की देवी मां सिद्धिदात्री की पूजा कर सकते हैं। मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से सभी प्रकार के शारीरिक एवं मानसिक वेदना से मुक्ति मिलती है।
देवी माँ के सामने एक दीप जलाकर रखें और हाथ में पुष्प लेकर देवी का ध्यान करें और बाद में उस पुष्प को माता के चरणों में छोड़ दें. इसके बाद माता की पूजा पुष्प, फल, रोली, चंदन, अक्षत, नारियल, आदि से करें और माता के मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ सिद्धिदात्री देव्यै नमः' का अधिक से अधिक जाप करें।
महानवमी के दिन मां सिद्धिदात्री को सूजी या गेहूं के हलवा का भोग लगा सकते हैं। इसके अलावा, चावल, दूध, चीनी एवं केसर युक्त खीर का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है। मां सिद्धिदात्री को मीठा पुलाव का भोग लगाने से घर-परिवार के रिश्तों में भी मिठास जन्म लेती है और रिश्ते मजबूत होते हैं। मां की कृपा से यश, बल और धन की प्राप्ति होती है। मां सिद्धिदात्री भक्तों को रोग, शोक और भय से मुक्त करती हैं।
मां सिद्धिदात्री की पूजा के बाद कन्याओं का घर बुलाकर उनके पैर धोकर आशीर्वाद लेना चाहिए। कन्याओं को हलवा-पूरी, चने का भोग लगाएं। भोजन कराने के बाद उनको लाल चुनरी उड़ाएं और रोली-तिलक लगाकर समार्थ्यनुसार भेंट देकर चरण स्पर्श करते हुए विदा करें। मां सिद्धिदात्री को मां सरस्वती का स्वरूप कहा जाता है जो श्वेत वस्त्र धारण किए हुए हैं और भक्तों का ज्ञान का आशीष प्रदान करती हैं। मां सिद्धिदात्री को कमल का पुष्प अर्पित करें।
