संसदीय क्षेत्र सीधी में पतंजलि का उद्योग लगाने का प्रस्ताव..?
हरिद्वार में बाबा रामदेव व आचार्य बालकृष्ण से मिले एमपी के डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ल व सांसद सीधी डा. राजेश मिश्रा
Newspost, Editorial Desk. @Rohit Gupta
पतंजलि योगपीठ के हरिद्वार स्थित संस्थान में बाबा रामदेव व आचार्य बालकृष्ण से भेंट करने पहुंचे मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला एवं सीधी के सांसद डा राजेश मिश्रा ने विंध्य क्षेत्र, विशेषकर सीधी संसदीय क्षेत्र में पतंजलि का उद्योग लगाने के साथ ही अन्य विषयों पर चर्चा की जानकारी सोशल मीडिया में साझा की है। यदि यह पहल गंभीर है तो वास्तव में स्वागत योग्य है।
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सांसद डा मिश्रा का कहना है-
“आज हरिद्वार में म.प्र शासन में माननीय उप-मुख्यमंत्री श्री Rajendra Shukla जी के साथ योगपीठ पतंजलि में पूज्य बाबा रामदेव जी एवं आचार्य बालकृष्ण जी से मुलाकात कर विन्ध सहित सीधी संसदीय क्षेत्र में पतंजलि का उद्योग लगाने एवं विभिन्न सकारात्मक विषयों पर चर्चा की।”
यदि पहल है गंभीर तो होंगे यह बदलाव:
यदि संसदीय क्षेत्र में पतंजलि का उद्योग स्थापित करने के लिए बाबा रामदेव एवं आचार्य बालकृष्ण से हुई भेंट में इन नेताओं द्वारा गंभीर पहल की गई है तो यह सचमुच स्वागत के योग्य है। पतंजलि यदि यहाँ अपनी उत्पादन इकाई स्थापित करती है, तब यहाँ के औषधीय वनोपज का स्थानीय स्तर पर उपयोग होने लगेगा। उसे उचित मूल्य मिलेगा। ग्रामीण जनजातीय समाज की आर्थिक शक्ति बढ़ाने में सहायक होगा। युवाओं को रोजगार मिलेगा। और सबसे बड़ी बात यह है कि सीधी संसदीय क्षेत्र में पर्यावरण विरुद्ध खनन, विद्युत, अल्युमिनियम व सीमेंट उद्योगों का संजाल है। ऐसे उद्योग गुणात्मक प्रदूषण फैलाने वाले हैं। जबकि इसके विपरीत यदि पतंजलि यदि यहाँ अपना उद्योग स्थापना करता है तब यहाँ के पहाड़, जंगल और जल स्त्रोतों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। किसान औषधीय पौधों की खेती के लिए प्रोत्साहित होंगे। क्षेत्रीय पर्यावरण संतुलन में यह उद्योग सहायक सिद्ध होगा। ग्रामीण महिला सहकारी समितियों, गृह व कुटीर उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।
संभावित बाधाएं व सावधानियां:
आगामी भविष्य में यदि पतंजलि यहाँ अपनी उत्पादन इकाई स्थापित करने की हामी भरती है, तब सबसे पहले कनेक्टिविटी, आवश्यक भूखण्ड की उपलब्धता, पर्यावरणीय क्लियरेंस की सबसे पहले जरूरत पड़ेगी।
वर्तमान में सड़क, रेल, वायु- इन तीनों माध्यमों में रीवा को छोड़कर शेष विंध्य का हिस्सा, खासकर सीधी संसदीय क्षेत्र व सिंगरौली जिला बहुत पिछड़े हुए हैं। एनएच 39, सिंगरौली- ललितपुर रेल परियोजना राजनीतिक कारणों से पिछड़ गए हैं। सिंगरौली- प्रयागराज एनएच की गति भी धीमी पड़ गई है। इस क्षेत्र में राजनीति के सहगामी व प्रश्रय प्राप्त भू एवं विस्थापन माफिया अत्यधिक सक्रिय हैं। इन्हें बहुत पहले ही उद्योग के स्थापित होने वाले इलाके की जानकारी मिल जाती है। लोगों का यह भी कहना है कि कतिपय नेताओं के प्रभाव में शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा यह जानकारी इन माफियाओं को लीक कर दी जाती है।
अधिग्रहण क्षेत्र में हो जाता है ताबड़तोड़ कब्जा:
अधिग्रहण क्षेत्र में प्रशासन की नाक के ठीक नीचे ताबड़तोड़ कब्जा होने लगता है। इन्हें रोकने और हटाने के बजाय स्थानीय निकाय, राजस्व व अन्य विभाग के भ्रष्ट लोगों द्वारा पुख्ता कागजात उपलब्ध करवा दिये जाते हैं। वैध कब्जाधारी बनने के बाद यही लोग संगठित होकर शासन- प्रशासन और उद्योग के प्रबंधन से बारगेनिंग करने लगते हैं। मूल हितग्राही किंकर्तव्यविमूढ़ और ठगा ठगा सा एक किनारे ढकेल दिया जाता है। इससे अधोसंरचना अथवा उद्योग की स्थापना में अस्वाभाविक देरी होती है। ऐसा होने से लागत कोई गुना बढ़ जाती है और प्रोजेक्ट ठंड़े बस्ते में चला जाता है।
बरतनी होगी सावधानी:
अब तक के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए माननीय जन प्रतिनिधियों को अत्यधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी। विंध्य अथवा संसदीय क्षेत्र में पतंजलि अथवा अन्य किसी प्रकार के उद्योग, अधोसंरचना विकास के कार्यों में बाधक बनने की छवि से उबरना होगा। भाई- भतीजावाद, अपने- पराए की भावना को तिलांजलि देकर एक सच्चे जनहितैषी विकास पुरुष के रूप में स्वयं को स्थापित करना होगा। जनता के साथ विनम्र और प्रशासन के गतिविधियों की सतत मॉनिटरिंग होने से परियोजनाएं समय से पूरी हो सकेंगी। इससे सुविधा बढ़ेगी, लागत नहीं।


