Festival Special
Newspost, Swami Dayanand Sharma.
वर्ष 2023 में धनतेरस 10 नवम्बर शुक्रवार को है और पूजा के लिए सायंकाल का समय उपयुक्त माना गया है. धनतेरस के दिन लक्ष्मी, गणेश, धनवंतरि और कुबेर की पूजा की जाती है…
धनतेरस के दिन लक्ष्मी पूजन करने से धन-धान्य की कमी नहीं होती है।
धनतेरस हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी या त्रयोदशी (जिस दिन सायंकाल त्रयोदशी हो) को हर साल धनतेरस का त्यौहार मनाया जाता है, जो छोटी दिवाली से एक दिन पहले आता है. इस दिन भगवान धनवंतरि की पूजा की जाती है और यह एक शुभ दिन माना जाता है. सोना, चांदी के आभूषण और बर्तन आदि चीजें खरीदना शुभ माना जाता है. इस साल धनतेरस 10 नवम्बर शुक्रवार को है.
धनतेरस 2023 का पूजा मुहूर्त
इस साल धनतेरस 10 नवम्बर को है और पूजा के लिए शाम का समय उपयुक्त माना गया है. शाम 5 बजकर 46 मिनट से लेकर 8.25 Pm के बीच पूजा का शुभ मुहूर्त है. यह समय धनतेरस की पूजा के लिए अच्छा माना गया है. भगवान धनवंतरि की पूजा इस समयकाल के दौरान की जा सकती है.
धनवंतरि और कुबेर की पूजा
भगवान धनवंतरि को विष्णु का रूप माना जाता है जो हाथ में अमृत कलश धारण किये होते हैं. इन्हें पीतल पसंद है इसलिए धनतेरस को पीतल या अन्य किसी धातु के सामान खरीदे जाते हैं. आरोग्य के देवता धनवंतरि और धन के देवता कुबेर की पूजा धनतेरस के दिन की जाती है.
धनतेरस का महत्व
कहते हैं कि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन भगवान समुद्र मंथन के दौरान भगवान धनवंतरि अपने हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे. यह भी मान्यता है कि चिकित्सा विज्ञान के प्रसार के लिए भगवान धनवंतरि ने अवतार लिया था. धनवंतरि को भारत सरकार का आयुष मंत्रालय राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाता है. पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक़ धनतेरस के दिन लक्ष्मी पूजन करने से धन-धान्य की कमी नहीं होती और लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा भी इस दिन घर में लानी चाहिए. धनतेरस के दिन संध्याकाल में दीपक जलाने की भी प्रथा है. इसे यम दीपक कहते हैं जो यमराज के लिए जलाया जाता।
