एसपीएम अध्यक्ष सतीश उप्पल ने फिर लिखा एनसीएल को पत्र, नापी रोकने हेतु किया अनुरोध
📌नापी प्रक्रिया नहीं रुकी तो 24 जुलाई से होगा एनसीएल मुख्यालय का घेराव
Newspost, MP Regional Desk, सिंगरौली।
गुरुवार के दिन भी एनसीएल द्वारा अधिग्रहण के लिये संपतियों का भौतिक सत्यापन करने के लिए अनुबंधित की गई टीआईएसएस की नापी करने आई टीम को नगर निगम के वार्ड क्रमांक 7, झुमरिया टोला के लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। वहाँ पहुंची टीम पर लोगों ने मनमाने ढ़ंग से मेजरमेंट बनाने का आरोप लगाया तथा सर्वे रिपोर्ट की प्रतिलिपि नहीं देने की बात कही। इसी बीच सिंगरौली पुनर्स्थापन मंच (एसपीएम) की टीम भी वहाँ पहुंच गई और बातचीत कर नापी कार्य को रुकवा दिया।
इस दौरान टीआईएसएस (TISS) टीम के साथ एनसीएल मुख्यालय एवं झिंगुरदा परियोजना के सुरक्षा कर्मी व संविदा सुरक्षा कर्मियों की वहाँ उपस्थिति थी। मोरवा ननि जोन के वार्ड क्रमांक 7 झुमरिया टोला में टीआईएसएस की टीम के पहुंचने के साथ ही लोग एकजुट होकर हंगामा शुरू कर दिए। इस हंगामे बीच टीम एक घर का नापी भी किया जा रहा था। दूसरी ओर सैकड़ों की संख्या में एकत्रित वहाँ के रहवासी नापी का विरोध कर रहे थे। कुछ लोगों का कहना था कि विस्थापन को लेकर एनसीएल द्वारा रोड मैप जारी नहीं किया गया है। नापी के कागजातों की प्रति भी हितग्राही को नहीं दी जा रही है और नापी से संतुष्ट होने के लिखित कथन पर जबरन हस्ताक्षर कराया जा रहा है।
SPM द्वारा NCL को लिखा गया पत्र-👇
सिंगरौली पुनर्स्थापन मंच ने गुरुवार को एनसीएल के सीएमडी को लिखे अपने पत्र में भूमि एवं परिसंपत्तियों का मूल्यांकन दर, बसाहट का स्थान, आदि से संबंधित पूर्व प्रेषित 24 सूत्री मांगों पर सकारात्मक निर्णय कर उसे सार्वजनिक करने के बाद ही नापी प्रक्रिया शुरु कराने का अनुरोध किया है। ऐसा नहीं किये जाने पर आगामी 24 जुलाई 2024 को सुबह 10.30 बजे से एनसीएल मुख्यालय के घेराव का अल्टीमेटम दिया है। देखें पत्र...👇👇

एनसीएल किसी भी बात को स्पष्ट नहीं कर रही है, इस बात को लेकर एनसीएल के प्रति नाराजगी जाहिर करते हुए बड़ी संख्या में लोग नापी का विरोध करते नजर आए। दूसरी ओर कुछेक का कहना था कि उनके घरों में दरारें आ रही हैं घर में रहना मुश्किल हो गया है, इसलिए हम अपने मकान का नापी करवाएंगे। हालांकि धीरे-धीरे वहाँ बड़ी संख्या में लोगों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया जिनमें जो नापी का विरोध कर रहे थे।
सोमवार को यहाँ आए कोयला व खनन राज्य मंत्री सतीश चन्द्र दुबे के रवाना होने के बाद, एनसीएल ने मंगलवार से नापी करने आई टीम को काम पर लगा दिया था जो पहले दिन बैरंग वापस चली गयी थी। दूसरे दिन बुधवार को 3 घरों का जैसे तैसे नापी का काम निबटाया। जबकि तीसरे दिन एनसीएल सुरक्षा कर्मियों के साथ आई टीम बड़े मुश्किल से एक ही घर का किसी तरह नापी कर सकी।
विदित हो कि एनसीएल की जयंत एवं दुधीचुआ खदान विस्तार हेतु नगर निगम सिंगरौली के मोरवा जोन के शहरी वार्डों के अधिग्रहण के लिए 9 फरवरी 2024 को सीबी एक्ट की धारा 9 लागू कर दी गई थी। इसके बाद से ही पुराने बसे इस शहर के 25 हजार से अधिक परिवारों तथा इस नगर पर आधारित लोगों में मुआवजा की दर, पुनर्स्थापन के स्थल एवं सामाजिक सुरक्षा व भविष्य के विषयों को लेकर असमंजस की स्थित बन गई थी जो अब भी बरकरार है। एनसीएल अधिकारियों के साथ हुई कई बार की बैठकों में भी कोई नतीजा नहीं आने से लोगों में एनसीएल प्रबंधन के प्रति दिनों दिन असंतोष बढ़ता जा रहा है। लेकिन अभी तक इसमें किसी भी प्रकार का एनसीएल द्वारा कोई ब्ल्यु प्रिंट विस्थापित होने वालों के लिये सार्वजनिक नहीं किया गया है।
विस्थापन व पुनर्वास मंच के नेताओं का आरोप है कि एनसीएल का रवैया सिंगरौली (मोरवा) के निवासियों के हितों के विपरीत दिखाई दे रहा है। उनके द्वारा अभी तक कुछ भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि पुनर्स्थापन के लिए प्लाट कहां दिया जाएगा। जमीन, मकान, पेड़, बोर, कुंआ एवं अन्य संपत्तियों का रेट भी स्पष्ट नहीं किया गया है। एनसीएल द्वारा किसी भी प्रकार का खाका सार्वजनिक नहीं किए जाने से स्थानीय लोगों में एनसीएल प्रबंधन के प्रति धीरे धीरे असंतोष बढ़ता दिखाई देने लगा है। संगठन ने आज फिर एनसीएल सीएमडी को पत्र सौंपकर समाधान की मांग की है। अन्यथा की स्थिति में 24 जुलाई प्रात: 10.30 बजे से एनसीएल हेडक्वार्टर का घेराव किया जाएगा।
