. ………… ✦••• जय श्री हरि •••✦ ……….
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? आज का पंचाग ?
Shared wth Courtesy by Swami Dayanand Sharma
04 अगस्त 2023 दिन शुक्रवार को अधिक श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है। आज संकष्टि श्रीगणेश चतुर्थी व्रत है, चन्द्र उदय रात्री 08:55 मिनट पर होगी। गणेश पूजन के उपरान्त चन्द्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलना चाहिए। आज पश्चिम दिशा मेँ शुक्र देवता अस्त हो जाएंगे। आप सभी सनातनियों को संकष्टि श्रीगणेश चतुर्थी व्रत की हार्दिक शुभकामनायें।।
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
? दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
? शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
? संवत्सर नाम अनला
? शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
?️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
⛈️ मास – श्रावण मास
? पक्ष – कृष्ण पक्ष
? तिथि : श्रावण मास कृष्ण पक्ष तृतीया तिथि 12:45 PM तक उपरांत चतुर्थी
? तिथि के स्वामी :- तृतीया तिथि की स्वामी माँ गौरी और कुबेर देव जी और चतुर्थी तिथि के स्वामी भगवान गणेश जी है।
? नक्षत्र : नक्षत्र शतभिषा 07:08 AM तक उपरांत पूर्वभाद्रपदा 04:44 AM तक उपरांत उत्तरभाद्रपदा
? नक्षत्र स्वामी : नक्षत्र का स्वामी राहु है। शतभिषा नक्षत्र का देवता, जल, बादल व वर्षा का स्वामी वरुण हैं।
? योग : शोभन योग 06:13 AM तक, उसके बाद अतिगण्ड योग 02:29 AM तक, उसके बाद सुकर्मा योग
⚡ प्रथम करण : विष्टि – 12:45 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : बव – 11:08 पी एम तक
? गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
? राहुकाल -दिन – 10:30 से 12:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
? सूर्योदय – प्रातः 06:04:08
? सूर्यास्त – सायं 19:20:31
?? ब्रह्म मुहूर्त : 04:20 ए एम से 05:02 ए एम
? प्रातः सन्ध्या : 04:41 ए एम से 05:44 ए एम
? अभिजित मुहूर्त : 12:00 पी एम से 12:54 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:41 पी एम से 03:35 पी एम
? गोधूलि मुहूर्त : 07:10 पी एम से 07:31 पी एम
? सायाह्न सन्ध्या : 07:10 पी एम से 08:14 पी एम
? अमृत काल : 09:32 पी एम से 10:59 पी एम
?️ निशिता मुहूर्त : 12:06 ए एम, अगस्त 05 से 12:48 ए एम, अगस्त 05
? यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
?? आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
??♀️ आज का उपाय-गणेश मंदिर में मोदक चढ़ाएं।
? वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – श्रीगणेश चतुर्थी व्रत (चंद्रोदय रात्रि 9:30 मि.), पंचक जारी, निर्देशक किशोर कुमार जन्म दिवस, भारत के प्रसिद्ध वनस्पतिशास्त्री परशुराम मिश्रा स्मृति दिवस, राजनीतिज्ञ सर फिरोजशाह मेहता जन्म दिवस, कार्य दिवस, विश्व स्तनपान दिवस (सप्ताह)
✍? विशेष – तृतीया तिथि में नमक का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। तृतीया तिथि एक सबला अर्थात बल प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह तृतीया तिथि आरोग्यकारी रोग निवारण करने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस तृतीया तिथि की स्वामिनी माता गौरी और इसके देवता कुबेर देवता हैं। यह तृतीया तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह तृतीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी जाती है।
? *_Vastu Tips_* ?
मंदिर से जुड़ी इन बातों का भी रखें विशेष ख्याल आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार मंदिर का निर्माण ईशान कोण ( पूर्व और उत्तर के बीच की दिशा) में करवाना सबसे अच्छा माना जाता है। लेकिन इस दिशा में मंदिर बनवाते समय एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि पूजास्थल के नीचे पत्थर का स्लैब न लगवाएं अन्यथा आप कर्ज के चंगुल में फंस सकते हैं।
पत्थर की जगह आप लकड़ी की स्लैब या अलग से लकड़ी का पूरा मंदिर बनवा सकते हैं। परंतु ध्यान रहे कि लकड़ी का मंदिर बिल्कुल दीवार से सटा ना हो, दीवार से थोड़ा हटाकर ही मंदिर का निर्माण करवाएं। अगर आप उत्तर-पूर्व दिशा में लकड़ी के मंदिर का निर्माण करवा रहे हैं तो मंदिर के नीचे गोल पाए जरूर बनवाएं।
⏯️ *_जीवनोपयोगी कुंजियां_* ⚜️
बच्चे को स्तनपान से होने वाले फायदे
बच्चे के जन्म के बाद मां का पहला दूध उसके लिए बेहद जरूरी होता है। इस दूध में कोलोस्ट्रम (Colostrum) होता है, जो शिशु के लिए फायदेमंद है।
मां के दूध से बच्चे की इम्यूनिटी बूस्ट होती है, जिससे वह कई तरह के संक्रमण से बचता है।
मां का दूध पीने से बच्चे के दिमाग का विकास होता है।
मां का दूध पीने से बच्चा कम बीमार पड़ता है और सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियां कम होती हैं।
? *_आरोग्य संजीवनी_* ?
नींबू से कैसे बनाएं हींग का अचार नींबू से अचार बनाने के लिए सबसे पहले आपको 10 से 15 नींबू को धोकर एक मिट्टी के बर्तन में रख लेना है। अब इसमें 2 चम्मच नमक और सिरका डाकर चार से पांच दिनों के लिए छोड़ दें। अब चौथे दिन 4 बड़े चम्मच हींग पाउडर लें। इसके साथ हरड़ के मोटे-मोटे दाने लें। सरसों और सौंफ के बीजों को पीसकर इसका पाउडर बना लें। अब एक कड़ाही लें और इसमें कम से कम 4 कप सरसों का तेल डालें। जैसे ही तेल गर्म होने लगे इसमें हींग, हरड़ और सरसों और सौंफ के बीजों का पाउडर डाल दें। रंग के लिए हल्दी, मिर्च और धनिया पाउडर डालें और इस तेल को अचार में पलट दें। अब इसे अच्छी तरह से मिलाएं और अचार को चीनी मिट्टी या सीसे की बरनी में शिफ्ट में कर दें। रोजाना कुछ दिनों तक इसे धूप दिखाते रहें। ये अचार लंबे समय तक आपके काम आएगी।
? *_गुरु भक्ति योग_* ?
*_इस्लाम की उत्पत्ति से पहले मुस्लिम क्या थे अथवा किस धर्म का पालन करते थे?_*
*_इसका बहुत ही सरल एवं सटीक जवाब हमारे हिन्दू धार्मिक ग्रंथो में मिल जाएगा।_*
*_कुरूवंश में पांडवो से कई पीढ़ियों पहले एक सम्राट हुए नहुष। उन्हे ऋषियों को श्राप था कि उनकी संतान कभी खुश नहीं रह सकेंगी। इस श्राप के बारे में पता चल जाने पर उनके बड़े बेटे यति घर छोड़कर वान चले जाते है। दूसरे बेटे ययाति राजा बनते हैं। ययाति अपने दो बेटों को आदेश देते है कि एक जाकर म्लेच्छ वान जाओ और दूसरे को यवन देश बसने के लिए कहते हैं। हम और आप सभी जानते हैं कि मुसलमानों के आक्रमण के समय या उससे पहले आर्यावर्त में उन्हे म्लेच्छ या गौभक्षक नाम से जाना जाता था और इस्लाम कि उत्पत्ति 1400 से 1500 साल पहले यवन देश में हुई थी। महाभारत में एक समय उल्लेख आता है जब जरासंध भगवान श्री कृष्ण से बार - बार युद्ध हार रहा था तब उसे पता चलता है कि यवन देश में एक राजा थे जिनकी कोई संतान नहीं थी तब उन्हे एक ऋषि के पुत्र के बारे में पता चलता है जिसे महादेव को वरदान प्राप्त था। वे उस अपना दत्तक पुत्र बनाकर ले आते हैं जो बड़ा होकर यवन का राजा बनता है और कनल यवन नाम से जाना जाता है। जरासंध को एक और मौका मिल जाता है और वो उस वरदान प्राप्त ऋषि पुत्र और यवन राज को भगवान कृष्ण से युद्ध करवाने के लिए यवन देश जाता है। तो उस यवन देश की संस्कृति को जो छोटी सी झलक मिलती है वह भी इस्लामिक संस्कृति और अरबी संस्कृति से मेल खाती है लेकिन इस्लाम कि उत्पत्ति उस समय चूंकि नहीं हुई थी इसलिए तब लोग भगवान को मानते थे और सनातन धर्म का पालन करते थे। जब काल यवन युद्ध करने आता है भगवान कृष्ण उसको अपने पीछे भगाकर गुफा में सो रहे ऋषि के सामने ले आते हैं। कल यवन ऋषि को श्री कृष्ण समझकर उठाने के लिए लात मारता है और जैसे ही ऋषि उठकर उस देखते हैं वह भस्म हो जाता है। इसी काल यवन को कई धारावाहिक में राक्षस तो पता नहीं क्या दिखाते हैं जबकि वो यवन देश का राजा था।_*
*_शेष कल_*
●●●●●★᭄ॐ नमः श्री हरि नम: ★᭄●●●●●
⚜️ तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है। अन्यथा इस तृतीया तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है। आज तृतीया तिथि को माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है। आज तृतीया तिथि में एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। आज तृतीया तिथि को भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये। देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है।
तृतीया तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से अस्थिर होता है अर्थात उनकी बुद्धि भ्रमित होती है। इस तिथि का जातक आलसी और मेहनत से जी चुराने वाला होता है। ये दूसरे व्यक्ति से जल्दी घुलते मिलते नहीं हैं बल्कि लोगों के प्रति इनके मन में द्वेष की भावना भी रहती है। इनके जीवन में धन की कमी रहती है, इन्हें धन कमाने के लिए काफी मेहनत और परिश्रम करना पड़ता है।
*_Gopi Ram_*
*_(ज्योतिषाचार्य)_*
*_सम्पूर्ण -------?_*
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