Newspost, National Corporate Desk. Rohit Gupta.

कोल इंडिया की कंपनी एनसीएल की कोयला खदान में की जाने वाली भारी ब्लास्टिंग से सिंगरौली (नगर निगम का मोरवा जोन) शहर की आबादी पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। यहाँ के सभी पक्के मकानों में आड़ी तिरछी दरारें पड़ चुकी हैं। छतों से बारिश का पानी रिसता है और कोयले की डस्ट सभी घरों की छतों से लेकर यहाँ की वनस्पति को अपने रंग में सराबोर कर लेती है। बोर वेल विफल होते जा रहे हैं, हैंडपंप गंदा पानी उगलते हैं। यही सच्चाई है। लेकिन एनसीएल के लोग हमेशा एक ही राग अलापते हैं कि वे खदानों में निर्धारित मापदण्ड और उच्च तकनीक से ही ब्लास्टिंग करते हैं। यह कहना है भाजपा के पूर्व सिंगरौली विधायक रामलल्लू बैस का। वे मंगलवार को स्थानीय मोरवा थाने में कलेक्टर सिंगरौली चंद्रशेखर शुक्ला, एसपी श्रीमती निवेदिता गुप्ता की विशेष उपस्थिति में नागरिकों के साथ आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस दौरान एनसीएल के अधिकारी भी मौजूद रहे।

सिंगरौली (मोरवा): कुछ बातें इस शहर की-

ज्ञात हो कि श्रृंगी ऋषि की भूमि पर आबाद इस नगर को कोयला परियोजनाओं के विस्तार के लिए उजाड़ने की भी योजना है। आननफानन सीबी एक्ट की धारा 9 बीते 9 फरवरी ’24 को लगा दी गई है। यहाँ के 4 कॉलेज व दर्जन भर स्कूलों में 18 हजार से अधिक छात्र पढ़ रहे हैं, नगरीय क्षेत्र में छोटी बड़ी लगभग 4300 दुकानें/ व्यावसायिक संस्थान, हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख व ईसाई समाज के पुरातन धर्म स्थान, ट्रांस्पोर्ट नगर, सब्जी व फल मंडी, अंतर्राज्यीय बस स्टैण्ड, क्लास 1 रेलवे स्टेशन, एन‌एच 39…यह सब है यहाँ। लेकिन बीते दशकों से जिले के इस पुरातन विकसित नगर के साथ तरह तरह का खेल खेला जाता रहा है। अब भी कुछ करीबी लोगों के कंधे पर बंदूक रखकर कोयला कंपनी हजारों परिवारों के भविष्य पर निशाना साधने का प्रयास कर रही है। चर्चा है कि समूचे बसे हुए शहर और इसके लोगों के विस्थापन व पुनर्वास को लेकर एनसीएल ने कोई ब्ल्यू प्रिंट नहीं बनाया है। लगभग साढ़े 4 हजार व्यापारियों, 18 हजार छात्र छात्राओं के साथ ही इस नगर पर हजारों की संख्या में निर्भर लोगों के भविष्य को लेकर भी किसी प्रकार का कोई खाका दिखाई नहीं दे रहा है। लोगों का कहना है कि जनमानस को हासिये पर डाल, बिना किसी योजना और तैयारी के सीबी एक्ट की धारा 9 लगा दी गई है। शहरी लोगों को नगर निगम क्षेत्र से दूर ऐसे गांवों में पुनर्वास की बात को हवा दी जा रही है जहाँ की आबोहवा यहाँ से भी अधिक प्रदूषित है। यही नहीं वहाँ वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए कोई संभावना नहीं है। यहाँ अध्ययनरत छात्रों के भविष्य के लिए भी बड़ा संकट है। ऐसे में यह विस्थापन भारत के ही नहीं दुनिया के इतिहास में जरूर दर्ज हो जाएगा और यहाँ के लोगों की तबाही और बर्बादी की चर्चा दुनिया भर में आने वाले कई दशकों तक होती रहेगी।

भाजपा के पूर्व विधायक सिंगरौली रामलल्लू बैस ने मंगलवार शाम मोरवा थाना परिसर में कलेक्टर चन्द्रशेखर शुक्ला व एसपी श्रीमती निवेदिता गुप्ता की उपस्थिति में आयोजित जन संवाद में कहा कि समस्या गंभीर है और एनसीएल गलतबयानी करती रही है। इस कार्यक्रम में एनसीएल के महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी भी शामिल रहे जिन्होंने कंपनी के पक्ष को रखा। इस अवसर पर सैकड़ों नागरिकों की उपस्थिति रही। ‎

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