*?️?? शुभ शुक्रवार ???️*
संसार में सब हमारे मित्र बन जायें यह किंचित सम्भव नहीं है लेकिन कोई हमारा शत्रु ना बनें, यह प्रयास अवश्य किया जा सकता है।हमारे मुख से सबके लिए प्रशंसा के शब्द ना निकलें कोई बात नहीं, पर हमारे मुख से किसी की निंदा ना हो यह तो किया ही जा सकता है। यदि आप किसी को अपनी थाली में से रोटी निकालकर नहीं खिला सकते तो किसी के निवाले को छीनने वाले भी ना बनें।
भगवद् अनुग्रह प्राप्त करने की प्रथम शर्त है पाप मुक्त जीवन से जाप युक्त हो जाना। विकार से विचार की यात्रा,वासना से उपासना के मार्ग पर चलने वाला ही सत्य की अनुभूति कर सकता है।
नाशवान वस्तुओं की प्राप्ति के लिए मन में उत्पन्न विकार का नाम ही वासना है। इस क्षणभंगुर संसार में ऐसी कोई उपलब्धि नही है जो आपको उबाऊ न बना दे।
उपासना का अर्थ है, स्वयं के भीतर छिपी हुई परम आनंददायी संपदा की खोज ,जो नित्य नूतन है,जो सनातन है उससे जुड़ने का प्रयास। जीवन की सार्थकता वासना पूर्ति में नही उपासना में है।
अंधकार से प्रकाश की ओर,असत्य से सत्य की ओर मृत्यु से अमरत्व की ओर की प्रार्थना ही उपासना है।
