पार्षद, ठेकेदार, ननि यंत्री, लैब व अन्य लपेटे में, जमीन पर एनटीपीसी ने बनवाई, ननि ने कागज पर दिखाई नाली और करा दिया लाखों का भुगतान 

Newspost, MP State Desk.

सिंगरौली, मध्य प्रदेश।  नगर पालिक निगम सिंगरौली इन दिनों खूब सुर्खियों में है। सूत्रों के अनुसार करोड़ों के घपले- घोटाले की जांच विभिन्न एजेंसियों द्वारा किया जा रहा है। इसी बीच ₹ 22 लाख में बनी कागजी नाली का मामला भी गरमा गया है। ननि वार्ड क्रमांक 36 जयनगर में दिनेश प्रताप सिंह के घर से धर्मेन्द्र सिंह के घर तक कागजों में बनी नाली का मामला जोर पकड़ लिया है। इस संबंध में बताया गया है कि नगर निगम से इसका जांच प्रतिवेदन एसपी ईओडब्ल्यू के यहां भेज दिया गया है। फिलहाल नगर निगम मुख्यालय बैढ़न में हड़कंप मचा हुआ है।

क्या है पूरा प्रकरण_

प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर पालिक निगम सिंगरौली के वार्ड क्रमांक 36, जयनगर के पार्षद प्रेमसागर मिश्रा द्वारा वार्ड में दिनेश प्रताप सिंह के घर से धर्मेन्द्र सिंह के घर तक नाली निर्माण के लिए 30 अगस्त 2022 को आयुक्त नपानि सिंगरौली के नाम से संबोधित पत्र आयुक्त को न देकर सीधे तत्कालीन सहायक यंत्री जेपी त्रिपाठी को दिया गया। जिस पर बिना आयुक्त के पृष्ठांकन के नाली निर्माण नस्ती तैयार की गई। 14 सितम्बर 2022 को तत्कालीन उप यंत्री एवं सहायक यंत्री द्वारा प्रस्तावित स्थल पर नाली निर्माण के लिए प्रस्ताव, नस्ती में प्राक्कलन राशि करीब 22 लाख रुपये को तैयार कर स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुत नोटशीट पर कार्यपालन यंत्री द्वारा 9 सितम्बर 2022 को तकनीकि स्वीकृति दे दी गई और नस्ती को वित्तीय व प्रशासकीय स्वीकृति के लिए आगे बढ़ाई गई। इसके उपरांत उपायुक्त वृत्त के द्वारा मौके के फोटोग्राफ संलग्न करने के लिए टीप रखा गया। उक्त टीप पर उपयंत्री के द्वारा प्रस्तावित स्थल के फोटोग्राफ संलग्न कर दिये गये। 

ऐसे मिली इस कार्य की स्वीकृति-

बताया जाता है कि आयुक्त नपानि सिंगरौली के यहां अब पार्षद के आवेदन सहित पूरी नस्ती वित्तीय व प्रशासकीय स्वीकृति हेतु भेजी गई। आयुक्त के आदेश दिनांक 21 अप्रैल 2023 के आधार पर ई-टेंडर की अधिसूचना जारी की गई। टेंडर में दो फर्माे ने भाग लिया जिसमें मेसर्स महाकाल ब्रदर्स को टेंडर मिला। 26 जुलाई 2023 को अनुबंध के अनुसार 4 अगस्त 2023 को कार्यादेश जारी कर कार्य प्रारंभ किया गया। नाली का निर्माण कार्य 9 अक्टूबर 2023 तक पूर्ण करने का लक्ष्य दिया गया था। 

यहाँ से मामले में आया मोड़_

ठेकेदार समय सीमा में कार्य पूर्ण नहीं कर सका। उसने कारण दर्शाया कि प्रस्तावित स्थल पर एनटीपीसी द्वारा रोड निर्माण कार्य कराया जा रहा है। दूसरी ओर नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार एनटीपीसी द्वारा प्रस्तावित स्थल पर किसी प्रकार के रोड़ का निर्माण कार्य नहीं किया गया। बल्कि ठेकेदार ने अन्य कारण से समय वृद्धि के लिए आवेदन लगाया है। सूत्र बताते हैं कि इसके कुछ दिनों बाद संंबंधित फर्म के द्वारा प्रस्तुत किये गये देयक, नस्ती पर जीएसटी सहित करीब 16  लाख 33 हजार रुपये का भुगतान नपानि के द्वारा कर दिया गया। जिसकी शिकायत हाल ही के दिनों में ईओडब्ल्यू रीवा एवं आयुक्त नपानि के यहां शिकायत कर्ता रामवंश प्रसाद के द्वारा की गई थी। ईओडब्ल्यू ने इस संबंध में आयुक्त से जांच प्रतिवेदन मांगा। जिस पर आयुक्त ने जांच कराकर प्रतिवेदन, ईओडब्ल्यू रीवा को भेज दिया है। 

ये आये हैं लपेटे में_

सूत्र बताते हैं कि ईओडब्ल्यू के यहां भेजे गये जांच प्रतिवेदन में पार्षद, नगर निगम के सिविल विभाग के यंत्री, समयपाल व मैटेरियल टेस्टिंग लैब ये सभी लपेटे में आए है। जांच प्रतिवेदन के अनुसार उक्त पीसीसी नाली निर्माण की स्वीकृत राशि 22 लाख रुपये एल-1 संविदाकार मेसर्स महाकाल ब्रदर्स के नाम से स्वीकृत कराकर फर्म को जीएसटी के अलावा करीब 16 लाख 33 हजार रुपये का भुगतान किया गया। जबकि यह नाली बनाई ही नहीं गई। एनटीपीसी द्वारा सीएसआर मद से बनवाई गई आरसीसी नाली को दिखाकर फर्जीवाड़ा किया जाना सिद्ध पाया गया है। 
रिपोर्ट में जिक्र किया गया है कि यह प्रकरण गंभीर वित्तीय अनियमितता के श्रेणी में आता है। जिसके लिए संविदाकार मेसर्स महाकाल ब्रदर्स, वार्ड पार्षद प्रेमसागर मिश्रा, उप यंत्री हेनरी ठाकुर, सहायक यंत्री रत्नाकर गजभिये (सेवानिवृत), कार्यपालन यंत्री व्हीपी उपाध्याय (सेवानिवृत), वार्ड क्रमांक 36 का समयपाल तथा 'लैब एकेजीओ' मटेरियल लेबोरेटरी ढोंटी को उत्तरदायी ठहराया गया है।

इन्होंने बताया -

‘शिकायत मिलने पर कार्यपालन यंत्री से जांच कराई गई। ईई मौके पर पहुंच जांच किये, नाली प्राक्कलन के अनुसार नहीं मिली, बगल में दूसरी नाली थी, जहां संदेह जाहिर हुआ कि उक्त नाली का एनटीपीसी ने निर्माण कराया है। इसके बाद एनटीपीसी से जानकारी ली गई। पता चला एनटीपीसी ने ही आरसीसी सड़क व नाली का निर्माण कराया है। एनटीपीसी की नाली को दिखाकर नपानि से भुगतान करा लिया गया। इसकी जांच रिपोर्ट ईओडब्लयू के यहां भेजी गई है।’

🔸डीके शर्मा, आयुक्त, नपानि सिंगरौली

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