यह प्रश्न कर रहा है प्रदेश के राजस्व की राजधानी का जनमानस

Newspost, State Desk- MP. सिंगरौली।

मध्य प्रदेश के धुर पूर्वोत्तर में उत्तर प्रदेश व छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित सिंगरौली अक्सर चर्चा में रहता है। पहले सार्वजनिक क्षेत्र (Public Sector) की कोयला खदानों, ताप विद्युत परियोजनाओं तथा उनसे जुड़ी तमाम गतिविधियों के कारण इस अंचल व जिले को ऊर्जाधानी कहा गया। जिला बनने के पूर्व से लेकर जिला बनने के बाद तक सिंगरौली राजनीति, शासन एवं प्रशासन के लिए अंगरेजी प्रिवी पर्स की तरह ही समझा गया। लेकिन निजी क्षेत्र की कोयला खदानों, तापीय विद्युत परियोजनाओं तथा अन्य उद्योगों के आने के बाद इसे विशुद्ध रूप से राजस्व की राजधानी (Revenue Capital) बना दिया गया है। यह कहना है यहाँ के प्रबुद्ध नागरिकों का। लोगों का कहना है कि मध्य प्रदेश को सर्वाधिक राजस्व सिंगरौली जिला प्रदान करता है।

आम चर्चाओं के अनुसार- सिंगरौली एक औद्योगिक जिला जरूर है। लेकिन श्रृंगी ऋषि की इस पवित्र धरती की चर्चा अब विशेषकर मौलिक नागरिक सुविधाओं के अभाव, राजनीतिक शिथिलता, प्रशासनिक असंवेदनशीलता, भ्रष्टाचार, सड़क दुर्घटनाओं, प्रदूषण, संगठित- असंगठित सफेदपोश अपराध, विस्थापन की त्रासदी, विस्थापन माफिया, बेरोजगारी आदि को लेकर अधिक होने लगी है। नगर पालिक निगम सिंगरौली का यह मामला एक बानगी है।

क्या है नगर निगम का मामला ?

नगरपालिक निगम सिंगरौली द्वारा नियमों को ताक पर रखकर टेंडर प्रक्रिया की गई और इसमें बरती गई अनियमितता के कारण करोड़ों का घोटाला किया गया। यह मामला तूल पकड़ने लगा है। बताया यह गया है कि ननि सिंगरौली द्वारा ई-टेंडरिंग के बजाय ऑफ लाईन टेंडर की प्रक्रिया अपनाई गई जिससे संविदाकार और अन्य लोगों की मोटी अनैतिक कमाई हुई थी। इस कथित घोटाले की शिकायत फिलहाल आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ रीवा में पहुंच गई है। ई.ओ.डब्ल्यू ने जांच की शुरूआत भी कर दी है। इसके बावजूद भी आमतौर पर लोग जांच के परिणाम को लेकर सशंकित जरूर हैं।

ईओडब्ल्यु में दर्ज हुई शिकायत

उक्त मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) रीवा की उप निरीक्षक भावना सिंह ने नगर पालिक निगम सिंगरौली के आयुक्त डी.के. शर्मा से शिकायत क्रमांक 177/25 को सत्यापित करने के लिए जानकारी व दस्तावेज उपलब्ध कराने हेतु पत्र लिखा है। बिना इ-टेंडरिंग के हुये कार्य एवं भुगतान की जानकारी मांगी है। घोटाले की शिकायत का सत्यापन आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ इकाई रीवा द्वारा किया जा रहा है। 

उक्त शिकायत में मांगी गई जानकारी/दस्तावेज

ईओडब्ल्यू द्वारा कार्यालय नगर पालिक निगम सिंगरौली का निविदा क्र. 9182/ तकनीकी/2021 सिंगरौली दिनांक 13. 01.21 की नोटिफिकेशन की सत्यापित प्रति, निविदा की नस्ती, नोटिफिकेशन, तकनीकी स्वीकृति, प्रशासनिक स्वीकृति तथा निविदाकारों के द्वारा प्रस्तुत निविदा में संलग्न संम्पूर्ण दस्तावेजों की प्रति, जारी निविदा हेतु गठित क्रय समिति के सदस्यों की जानकारी एवं समिति गठित करने के आदेश की प्रति तथा तुलनात्मक चार्ट सभी की सत्यापित प्रति मांगी गई है। 

निविदा कार्यवाही की मूल नोटशीट की सत्यापित प्रति, निविदा में योग्य एवं अयोग्य निविदाकारों की सूची ई-टेण्डरिंग में आनॅलाइन की गई कार्यवाही के प्रिंटआउट की सत्यापित प्रति, निविदा के अंतर्गत किये गये कार्यों के भौतिक सत्यापनकर्ता अधिकारी की जानकारी, भौतिक सत्यापन की प्रति, कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र की प्रति, निविदाकार को भुगतान की गई राशि की जानकारी भी आर्थिक अपराध शाखा द्वारा मांगी गई है। पता चला है कि यह सभी जानकारी भेज दी गई है। 

इनका कहना है...

“वर्ष 2021 में ई-टेडरिंग (e-tendering) के निविदा को आफ लाईन (Offline) निविदा कर ठेकेदार को लाभ पहुंचाया गया है। जबकि नियमानुसार एक लाख से अधिक का कार्य इ-टेंडरिंग के माध्यम से होना चाहिए। इसकी जांच मेरे द्वारा भी की जा रही है। साथ ही ईओडब्ल्यू रीवा में शिकायत होने पर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) द्वारा भी जांच की जा रही है। ईओडब्ल्यू द्वारा मांगी गई जानकारी हमारे द्वारा भेज दी गई है। दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध कार्यवाही की जायेगी।” 

🔸डी.के. शर्मा, आयुक्त, नगरपालिक निगम सिंगरौली

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