केंद्र सरकार की योजना तैयार, 2026-27 की जनगणना बनेगी आधार, देश के सांसदों को सौंपे गए तीन नए विधेयकों से हुआ स्पष्ट

Newspost, Political Desk. New Delhi. ✒️ Rohit Gupta.
भारतीय संसद के लोकसभा में अब 543 नहीं, अब 850 सांसद होंगे। सांसदों को सौंपे गए तीन नए विधेयक स्पष्ट करते हैं कि केंद्र सरकार लोकसभा की ताकत 543 से बढ़ाकर 850 करने की तैयारी कर रही है। इसमें राज्यों के लिए 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें प्रस्तावित हैं। 2026 से शुरू होने वाली जनगणनाइन नई सीटों का आधार बनेगी। इसके साथ ही परिसीमन आयोग का गठन और महिला आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करने का कानूनी ढांचा तैयार कर लिया गया है।
इन बिंदुओं पर ध्यान दें -
- संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 (107): यह विधेयक लोकसभा में सीटों की संख्या को अधिकतम 815 (राज्यों से) और 35 (केंद्र शासित प्रदेशों से) तक बढ़ाने का प्रावधान करता है।
- परिसीमन विधेयक, 2026 (108): नवीनतम जनगणना के आंकड़ों के आधार पर लोस और विस की सीटों के आवंटन और निर्वाचन क्षेत्रों के विभाजन के लिए एक परिसीमन आयोग के गठन का प्रावधान करता है।
- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 (109): यह विधेयक पुडुचेरी, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के कानूनों में संशोधन करता है, ताकि उन्हें नए परिसीमन नियमों के अनुरूप बनाया जा सके।
केंद्र सरकार ने देश के लोकतांत्रिक ढांचे में बड़े बदलाव लाने वाले तीन प्रमुख विधेयकों का मसौदा सांसदों को दिया है।
केंद्र सरकार संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 जल्द पास कराने की तैयारी कर रही है। ये विधेयक आगामी जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर अधिकतम 850 करने, निर्वाचन क्षेत्रों के नए सिरे से निर्धारण और महिला आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करने का वैधानिक मार्ग प्रशस्त करते हैं।
सरकार के इस कदम के साथ ही दशकों से लंबित सीटों के पुनर्गठन और भाषाई व क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की नई व्यवस्था पर औपचारिक मुहर लगने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। वर्ष 2026 में पेश किए गए ये तीनों विधेयक भारत के चुनावी ढांचे और सीटों के पुनर्निर्धारण में व्यापक बदलाव का प्रस्ताव करते हैं।
आपको बता दें कि देश में बहुआयामी जनगणना चल रही है जो 2027 तक चलेगी। जनगणना प्रक्रिया के पूर्ण होने के बाद संसदीय क्षेत्रों के परिसीमन का कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।
सिंगरौली बन सकता है अलग संसदीय क्षेत्र
सीधी लोकसभा सीट जो सीधी सिंगरौली तथा शहडोल जिले तक फैला है। इसका परिसीमन भी संभावित है। नये परिसीमन के बाद अब तक राजनीतिक सौतेलेपन की पीड़ा झेल रहे सिंगरौली वासियों को उनका अपना लोकसभा क्षेत्र मिल सकता है। सिंगरौली को एक नया लोकसभा क्षेत्र बनाया जा सकता है। इसकी संभावना प्रबल है। अगले साल परिसीमन के बाद यदि सिंगरौली नया संसदीय क्षेत्र बनाया जाता है तो यह भी निश्चित है कि इसी जिले से सांसद भी बनेगा और उसकी संवेदनशीलता भी अपने जिलावासियों के लिए ही होगी। फिलहाल आगामी वर्ष तक प्रतीक्षा करनी होगी। संभव है कि 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव में सिंगरौली का अपना सांसद मिल जाएगा।
