🪷 ॥ आज का भगवद् चिन्तन ॥ 🪷|| सत्य का चुनाव करें ||

Newspost, Spiritual Desk. Content- Swami Dayanand Sharma

        शांति बनाये रखने के लिए सत्य को ही छोड़ देना, यह उचित नहीं है। आवश्यक नहीं कि जीवन में सत्य और शांति एक ही साथ प्राप्त हो। यदि परिस्थिति ऐसी बन जाये जब शांति और सत्य में से किसी एक को चुनना पड़े तो निःसंकोच सत्य को चुन लेना ही श्रेष्ठ है। भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण चाहते तो अपनी शांति के लिए कभी भी असत्य का विरोध न करते।

       हमारे महापुरुषों ने केवल और केवल इसलिए अशांति एवं कष्टों से भरे जीवन के दुर्गम मार्ग को स्वीकार किया ताकि सत्य का वरण और रक्षण किया जा सके। यद्यपि जीवन का लक्ष्य शान्ति प्राप्ति ही है पर वो शांति, जिसकी प्राप्ति सत्य के द्वारा होती है। अतः सत्य के लिए शांति छोड़ी जा सकती है पर शांति के लिए सत्य कदापि नहीं। कब, कहां और कैसे सत्य का चुनाव करना है स्वयं विवेक से चिन्तन करें एवं निर्णय लें।

       हमारी बोली में माधुर्य के साथ-साथ शिष्टता भी होनी चाहिए। हमारी वाणी ही हमारी शिक्षा-दीक्षा, कुल की परंपरा और मर्यादा का परिचय देती है। मधुर वाणी से मनुष्य, पशु-पक्षी भी प्रिय बन सकते हैं। यह वह रसायन है जिससे लोहा भी सोना बन जाता है, यह ऐसी औषधि है। "जीवन लंबा हो न हो महान होना चाहिए।"

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