?️?महाशिवरात्रि की शुभ कामना??️
Newspost, Spiritual Desk, Swami Dayanand Sharma.
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम् ।
सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि ॥
जयः शत्रुपरांगमुखीकरणेन लब्धस्योत्कर्षस्य इत्यमरविवेके।
प्रस्तुत श्लोक में मंगल-ध्वनियों और आनंदोल्लास से वातावरण परिपूरित है और क्यों न हो, शिव और शक्ति का विवाह है तथा यह सम्पूर्ण जगत शिव-शक्तिमय है, पार्वती -परमेश्वर जगत के माता -पिता हैं ।
ॐ नमः मनोभिलाषितं वरं देहि वरं ह्रीं ॐ गौरा पार्वती देव्यै नमः।
आप जैसे भी रहें बस प्रभु के बनकर प्रभु शरणागत रहें, यही जीवन आनंद का मार्ग है। अपने आप को सदैव प्रभु का अंश समझते हुए आनंदित रहकर जीवन जीने का अभ्यास करना चाहिए। प्रत्येक पल भगवान का स्मरण करें और उन्हें अपना मानें। इससे भगवद् चरणों में प्रीति प्रकट हो जाएगी।
भगवान का हृदय से आश्रय करते ही भगवदीय गुण भी स्वतः प्रगट होने लगते हैं। छोटा बालक माँ-माँ करता है। उसका लक्ष्य, उसका ध्यान और उसका विश्वास माँ शब्द पर नहीं होता अपितु माँ के सम्बन्ध पर होता है। ताकत माँ शब्द में नहीं है, माँ के सम्बन्ध में है। इसी प्रकार ताकत भगवान के सम्बन्ध में है।
सुप्रभात! आपका दिन शुभ मंगलमय हो!
