‼🪷 प्रातः नमन, सुप्रभात 🪷‼
Newspost, Culture/Spiritual Desk. Swami Dayanand Sharma.
समाज के समक्ष सदैव वही जीवन वंदनीय एवं अनुकरणीय बन सका जिसने अपने बड़ों का सम्मान करना सीखा। अपने से बड़ों के कटु शब्द जीवन में नीम के पत्तों के समान ही हैं। नीम के पत्ते कड़वे तो होते हैं..लेकिन स्वास्थ्य के लिए एक औषधि के रूप में ही कार्य करेंगे!बड़ों के कड़वे शब्द आपके जीवन के लिए अति हितकर ही सिद्ध होंगे..।
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अच्छा बोलना, दूसरों की मदद करना और माता-पिता तथा बड़ों का आदर सम्मान करना ही संस्कार है। हमें हर उस व्यक्ति से संस्कार मिलते है जो हमसे बड़ा हो, चाहे वह दादा-दादी, माता-पिता,भाई बहन या अन्य सभी हमें सही रास्ता दिखाते हैं और हमें भी उनकी आज्ञा का पालन करना और दी गई सीख को ही अपनाना चाहिए।
इतिहास बोध से कटा व्यक्ति जड़ से टूटे वृक्ष समान
हम सब कुछ बदल सकते हैं, लेकिन पूर्वज नहीं। हम उन्हें छोड़कर इतिहास बोध से कट जाते हैं और इतिहास बोध से कटे समाज जड़ों से टूटे पेड़ जैसे सूख जाते हैं। जिस परिवार में बड़े बुजुर्गों का सम्मान नहीं होता उस परिवार में सुख, संतुष्टि और स्वाभिमान नहीं आ सकता। हमारे बड़े बुज़ुर्ग हमारा स्वाभिमान हैं, हमारी धरोहर हैं। उन्हें सहेजने की जरूरत है।
