Tag: हरि चर्चा

Devotion/ भक्ति: हम सोचत कछु और हैं, होवत है कछु और….

Newspost. चलो रे मन वृंदा वन की ओर….. मेरे मन कछु और है, दाता के कछु और, हम सोचत कछु और हैं, होवत है कछु और। सुख की मृगतृष्णा ले…