Newspost, Spiritual Desk Swami Dayanand Sharma.

सत्य और संकल्प में भक्त और भगवान के समान संबंध है। जैसे भक्त के बिना भगवान और भगवान के बिना भक्त का कोई अस्तित्व नहीं होता, वैसे ही सत्य के मार्ग में बढ़ते हुए यदि मनुष्य में संकल्प शक्ति की कमी है, तो सत्य तुरंत दम तोड़ देता है। ” “सत्य का मार्ग बहुत कठिन और संघर्ष युक्त है। इसीलिए प्रतिदिन कार्य प्रारम्भ करने से पहले संकल्प लेना चाहिए, फिर कार्य करना चाहिए।” “शास्त्रों के अनुसार संकल्प लेने का अर्थ है कि इष्टदेव और स्वयं को साक्षी मानकर संकल्प लें कि हम यह कार्य अपने सकारात्मक लक्ष्य की पूर्ति के लिए कर रहे हैं।

      अगर जीवन में आपके संकल्प मजबूत हों..तो कुछ भी प्राप्त करना असंभव नहीं रह जाता है। दृढ़ संकल्प का अर्थ है..लक्ष्य को आधा प्राप्त कर लेना..हमारे निर्णय जितनी बार बदलते रहेंगे..हमारी सफलता भी उतनी ही प्रभावित होगी..।

      "संकल्प शुभ हो, श्रेष्ठ हो और दृढ़  हो तो कुछ भी ऐसा नहीं जिसे प्राप्त न किया जा सके। जितना भी सृजन महान व्यक्तियों के द्वारा इस धरती पर हुआ है.. वह अनुकूल परिस्थितियों के कारण नहीं.. केवल मजबूत संकल्पशक्ति के कारण ही हुआ है...। 
संपादन-रोहित गुप्त 'मन'.

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