ग्रहण-काल : संबंधों की कसौटी
Newspost, Editorial Desk. ✒️ Swami Dayanand Sharma ✍️.
आज 3 मार्च 2026 को होलिका दहन और रंगों के पर्व होली के बीच पूर्ण चंद्रग्रहण लग रहा है। यह इस साल का पहला चंद्रग्रहण है। महत्वपूर्ण बात यह है कि आकाश में लगने वाला ग्रहण केवल खगोलीय घटना नहीं होता, वह जीवन के सूक्ष्म नियमों की ओर भी संकेत करता है। जैसे सूर्य और चंद्रमा का प्रकाश किसी क्षण ढँक जाता है, वैसे ही मनुष्य के संबंधों में भी ऐसे काल आते हैं जब प्रेम की रोशनी मंद पड़ जाती है। इन क्षणों को समझना, उन्हें कोसने से अधिक आवश्यक है।
जिस प्रकार चंद्र ग्रहण तब घटित होता है जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है, उसी प्रकार जीवन में भी ग्रहण-काल तब आता है जब दो प्रेम करने वालों के बीच कोई तीसरा अवरोध प्रवेश कर जाता है। यह अवरोध व्यक्ति नहीं, बल्कि अहं, भय, संदेह, अपेक्षा या बाहरी दबाव हो सकता है। उस समय प्रेम नष्ट नहीं होता, केवल ढँक जाता है—जैसे चंद्रमा लुप्त नहीं होता, बस उसकी आभा पर छाया पड़ जाती है।
ग्रहण स्थायी नहीं होता—न आकाश में, न जीवन में। जैसे ही बीच का अवरोध हटता है, प्रेम का प्रकाश पुनः प्रकट हो जाता है। इसलिए संबंधों के ग्रहण-काल को दोष या अभिशाप नहीं, बल्कि आत्म-परीक्षण और शुद्धि का अवसर समझना चाहिए। जो इस सत्य को पहचान लेता है, वह जान जाता है कि प्रेम का सूर्य कभी अस्त नहीं होता; केवल छाया का क्षण आता है—और वह भी सदा के लिए नहीं। 🙏🪷
हमारी ओर से भारत और विश्व के अन्य देशों में निवासरत सभी भारतवासियों को समरसता के महापर्व होली की हार्दिक शुभकामनाएं ! इति शुभम् भवतु. 🎉🎊🎉🙏🏻🙏🏻
