प. बंगाल के एक प्रसिद्ध हिंदी कवि अभिनंदन गुप्त की कविता के माध्यम से हम दे रहे हैं काव्यमय शुभकामना. कृपया स्वीकार करें
Newspost, Literary Desk.
नये वर्ष की नई सुबह है।
खुश होने की कई वजह है।
पहला- मौसम हुआ सुहाना।
बागों मे कोयल का गाना।
दूसरा– शीतल मन्द बयार।
प्रकृति मां सी रही दुलार।
तीसरी–धरती सजी दुल्हन सी।
छेड़छाड़ नदियों से पवन की।
चौथा– अम्बर का मन पागल।
धरती से मिलने को व्याकुल।
पांचवा–मौसम का सम होना।
दुविधा मे है पड़ा बिछौना।
खेतों मे लहराती फसलें।
श्वेत वस्त्र पहने से बगुले।
इसे स्वीकारें सभी सहर्ष।
अपना तो है यही नववर्ष।
भारतीय नव वर्ष की सभी को हार्दिक शुभकामनाये🙏

कविवर : अभिनंदन गुप्त
पता- खड्गपुर, प. बंगाल (भारत)